मध्यप्रदेश में यूरिया संकट पैदा हो गया किसानों का आंदोलन, कांग्रेस ने BJP को घेरा

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दिसंबर में सिर्फ 1.10 लाख टन यूरिया ही प्रदेश को मिल पाया है. यूरिया की किल्लत से परेशान किसानों ने कई जिलों में आंदोलन शुरू कर दिया है मध्य प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद यूरिया पर सियासत शुरू हो गई है. दरअसल प्रदेश के कई जिलों में यूरिया का संकट पैदा हो गया है. इसी यूरिया की किल्लत के चलते प्रदेश के कई जिलों में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. कांग्रेस के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सरकार आते ही यूरिया की आवक घट गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया है कि बीजेपी तीन राज्यों में मिली हार को पचा नहीं पा रही है, इसलिए मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकर आते ही केंद्र सरकार ने किसानों को परेशान करना शुरू कर दिया है शुक्रवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यूरिया संकट पर ट्वीट कर जानकारी दी. सीएम ने ट्वीट कर कहा कि ‘रबी के सीज़न में यूरिया के संकट को देखते हुए किसान भाइयों को यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिये राज्य सरकार गंभीर है. आपूर्ति बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार से भी चर्चा की गई है. मध्य प्रदेश सरकार निरंतर प्रयासरत है. किसान हित सर्वोपरि. बता दें, विधानसभा चुनाव से पहले नवंबर महीने में ही मध्यप्रदेश में 4.10 लाख टन यूरिया आया था, लेकिन कांग्रेस सरकार आने के बाद दिसंबर के 20 दिनों में सिर्फ 1.10 लाख टन यूरिया ही मिल पाया है. रबी के मौसम में गेहूं, चना, मसूर समेत अन्य रवि की फसलों के लिए यूरिया की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में प्रदेश के अधिकतर जिलों में मांग के हिसाब से आपूर्ति नहीं हो पा रही है. सीएम कमलनाथ ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से यूरिया की रैक बढ़ाने के साथ-साथ उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा से भी फोन पर बात की, हालांकि बीजेपी का कहना है कि संकट की ज़िम्मेदार खुद कांग्रेस है जिसने पहले से खाद की उपलब्धता की व्यवस्था ही नहीं की. बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी गुटबाजी से ही बाज नहीं आ पा रही है और अगर यूरिया की कमी केंद्र सरकार कर रही है तो कर्नाटक और पंजाब में यूरिया की कमी क्यों नही हो रही?

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