मध्य प्रदेश की उन VVIP सीटों के बारे में, जिन पर कल होगी सबकी नजर जानिए रिजल्ट

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मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को विधानसभा चुनाव हुए , जिसका रिजल्ट (mp election result 2018) 11 दिसंबर को आना है. मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीट हैं . केवल 230 सीटों पर ही वोटिंग की जाती है. एक सीट पर सदस्य को नामित किया जाता है. इस बार (Exit Poll 2018) के अनुसार राज्‍य में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्‍कर दिख रही है. चौथी बार शिवराज सिंह चौहान सत्‍ता से दूर हो सकते हैं. बीजेपी और कांग्रेस के अलावा इस बार कई ऐसी सीटें भी हैं जहां बसपा, सपा व अन्य दलों ने भी ताकत दिखाई है, जिसके कारण मुकाबला त्रिकोणीय या फिर चतुष्कोणीय हो चला है, ऐसे में ये कह पाना मुश्किल है कि जीत बीजेपी की होगी या फिर कांग्रेस की
इन सीटों पर है सबकी नजर
भोपाल मध्य :यहां भाजपा के वर्तमान विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह और कांग्रेस के आरिफ मसूद के बीच करीबी मुकाबला है. काफी हद तक हिंदू-मुस्लिम मतदाता यहां प्रत्याशी की जीत-हार तय करते हैं. आरिफ ने यहां से पिछला चुनाव भी लड़ा था
भोपाल दक्षिण-पश्चिम: इस सीट पर भाजपा के वरिष्ठ विधायक उमाशंकर गुप्ता और कांग्रेस के पूर्व विधायक पीसी शर्मा के बीच कांटे की टक्कर रही. यह भोपाल की सबसे ज्यादा चर्चित सीट बनी हुई है
विदिशा: लंबे समय से भाजपा के कब्जे वाली इस सीट पर मुकेश टंडन की सीधी टक्कर कांग्रेस के शशांक भार्गव से रही. आप प्रत्याशी पूर्व विंग कमांडर अनुमा आचार्य के यहां से मैदान के उतरने के कारण यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया.
सांची: भाजपा के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित ने पहली बार यहां से चुनाव लड़ा. उनका मुकाबला कांग्रेस के प्रभुराम चौधरी से है. यह सीट भी चर्चा का केंद्र है.
इंदौर 3:भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय यहां से पहली बार चुनाव मैदान में हैं. उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश जोशी के भतीजे अश्विन जोशी से है.
होशंगाबाद: यहां बीजेपी ने विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा और कांग्रेस ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे सरताज सिंह को मैदान में उतारा. बीजेपी से टिकट न मिलने से नाराज सरताज सिंह को कांग्रेस ने बगावत के कुछ ही घंटे बाद टिकट दे दिया था.
वारासिवनी: कांग्रेस ने इस सीट से मुख्यमंत्री के साले संजय मसानी को मैदान में उतारा. इससे पहले संजय सिंह बीजेपी में थे. भाजपा ने विधायक योगेंद्र निर्मल को दोबारा मौका दिया है. मसानी के चुनाव लड़ने के कारण यह सीट चर्चा में है.
खुरई: गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह का मुकाबला कांग्रेस के अरुणोदय चौबे से होने के कारण यह सीट चर्चा में है. यहां भी दोनों के बीच कांटे का मुकाबला रहा. बुंदेलखंड अंचल की यह सीट चर्चा के केंद्र में है.
ग्वालियर – भाजपा सरकार में मंत्री जयभान सिंह पवैया का मुकाबला कांग्रेस के प्रद्युम्न सिंह तोमर से है. यह सीट भी सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र है                                                                                           ग्वालियर दक्षिण: यहां से भाजपा की बागी पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता पार्टी के प्रत्याशी नारायण सिंह कुशवाह के लिए परेशानी खड़ी कीं. समीक्षा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा. कांग्रेस से प्रवीण पाठक मैदान में रहे.                                जबलपुर पश्चिम: भाजपा के पूर्व विधायक हरेंद्रजीत सिंह बब्बू की सीधी टक्कर कांग्रेस के वर्तमान विधायक तरूण भनोत से है. पिछले चुनाव में बब्बू 923 वोटों से हारे थे.                                                                                    जबलपुर पूर्व: यहां से भाजपा ने अंचल सोनकर पर पुन: विश्वास जताया. उनका मुकाबला लखन घनघोरिया रहा. इस सीट पर भी पेंच फंसा हुआ है.
जबलपुर उत्तर: भाजपा ने शरद जैन को यहां से फिर टिकट दिया है. उनका मुकाबला कांग्रेस के विनय सक्सेना से है. लेकिन जैन के सामने युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा से बागी हुए धीरज पटैरिया निर्दलीय खड़े हो गए जो जैन के लिए बड़ी चुनौती हैं.
बालाघाट: यहां भाजपा के गौरीशंकर बिसेन का मुकाबला कांग्रेस विश्वेश्वर भगत से है. वहीं, सपा से अनुभा मुंजारे मैदान में हैं जो पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहीं थी. यह सीट त्रिकोणीय मुकाबले की वजह से चर्चा में है.                         चाचौड़ा:  कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह और भाजपा से विधायक ममता मीना का मुकाबला है.
मुरैना: भाजपा के वरिष्ठ नेता रुस्तम सिंह का मुकाबला कांग्रेस के रघुराज सिंह कसाना और बसपा के बलवीर सिंह दंडोतिया से है. यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है.
सीहोर: पिछले चुनाव में निर्दलीय खड़े हुए सुदेश राय को भाजपा ने यहां से टिकट दिया. इस बार यहां से भाजपा के पूर्व विधायक रमेश सक्‍सेना की पत्नी ऊषा सक्सेना निर्दलीय चुनाव लड़ी. कांग्रेस से सुरेंद्र सिंह ठाकुर मैदान में थे.
नागौद: भाजपा ने यहां से नागेंद्र सिंह और कांग्रेस ने यादवेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है. जातिगत समीकरण की वजह से यहां दोनों में कांटे की टक्कर रही.
रैगांव: पिछले चुनाव में इस सीट पर बसपा की ऊषा चौधरी ने भाजपा के पुष्पराज बागरी को 4109 मतों से हराया था. चौधरी इस बार भी इसी सीट से चुनाव लड़ीं. उनका मुकाबला भाजपा के पूर्व मंत्री जुगलकिशोर बागरी और कांग्रेस की कल्पना वर्मा से था.
अमरवाड़ा: भाजपा के प्रेमनारायण ठाकुर और कांग्रेस से वर्तमान विधायक कमलेश शाह यहां से मैदान में हैं. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता मनमोहन शाह बट्‌टी भी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. वे 2003 में गोंगपा से विधायक रह चुके हैं.
अंबाह: बसपा ने वर्तमान विधायक सत्यप्रकाश का मुकाबला भाजपा के गब्बर सिंह और कांग्रेस के कमलेश जाटव से रहा. यह सीट भी रोचक मुकाबले में फंसी है.
दमोह: वित्त मंत्री जयंत मलैया की टक्कर कांग्रेस के राहुल सिंह लोधी से है. लेकिन उनके लिए भाजपा से ही बागी हुए रामकृष्ण कुसमरिया बड़ी चुनौती थे.
निवाड़ी:  यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने से सीट फंस गई है. भाजपा ने यहां से अनिल जैन, कांग्रेस ने सुरेंद्र सिंह यादव और सपा ने मीरा यादव को मैदान में उतारा
अटेर: भाजपा के अरविंद भदौरिया का मुकाबला कांग्रेस से वर्तमान विधायक हेमंत कटारे से है. क्षेत्र में जातिगत समीकरण का भी गहरा प्रभाव है. इस वजह से यह सीट भी चर्चा में है.
छतरपुर: इस सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे सत्यव्रत चतुर्वेदी के भाई आलोक चतुर्वेदी और भाजपा की अर्चना सिंह का मुकाबला रहा. भाजपा में मंत्री ललिता यादव ने यहां से अपनी सीट बदली थी.
कालापीपल:  कांग्रेस ने यहां से युवा कांग्रेस के कुणाल चाैधरी पर भरोसा जताया. भाजपा से बाबूलाल वर्मा प्रत्याशी थे. यहां भी दाेनों दलों के प्रत्याशियों के बीच रोचक मुकाबला है.
सिलवानी: भाजपा सरकार में मंत्री रामपाल सिंह का मुकाबला कांग्रेस के देवेंद्र पटेल से रहा. कांटे की टक्कर की वजह से इस सीट पर मतदाताओं की नजर है
घटि्टया: यहां से भाजपा ने कांग्रेस के नेता रहे प्रेमचंद गुड्‌डू के बेटे अजीत बौरासी को टिकट दिया. कांग्रेस से रामलाल मालवीय मैदान हैं. भाजपा के वर्तमान विधायक का टिकट कटने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी रही. इस वजह से यह सीट भी उलझी हुई है.

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