दिलचस्प कहानी: नाविक ने ऐसे उतारा दंभी आदमी का घमंड नहीं करना

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एक बार वह यात्रा पर निकला। नदी पार करने के लिए वह नाव पर सवार हुआ। उसने बड़े घमंड के साथ नाविक से पूछा, ‘क्या तुमने व्याकरण पढ़ी है?’एक आदमी ने अपनी आधी उम्र पढ़ने में गुजार दी। पढ़ाई-लिखाई करने के बावजूद उसमें विनम्रता नाम की कोई चीज नहीं थी। उसको काफी अहम हो गया था। वह अपने आगे किसी को भी विद्वान मानने को तैयार नहीं था। भले ही कितनी ही बहस करना पड़े, लड़ाई-झगड़े की नौबत आ जाए। परन्तु वह अपना अहम छोड़ने के लिए तैयार नहीं था।नाविक बोला, ‘नहीं।’दंभी व्यक्ति बोला, ‘अफसोस है तुमने आधी उम्र यों ही गंवा दी।’ नाविक सुनकर चुपचाप रहा। आसमान में बादल उमड़-घुमड़ रहे थे। हवाएं तेज हो चली थी। थोड़ी देर बाद उसने फिर नाविक से पूछा कि, ‘तुमने इतिहास और भूगोल पढ़ा है।’ नाविक ने उसकी ओर देखा और सिर हिलाते हुए कहा, ‘नहीं।’ दंभी व्यक्ति ने कहा फिर तो तुम्हारा पूरा जीवन ही बरबाद हो गया। मांझी को बड़ा क्रोध आया, लेकिन उस समय वह कुछ नहीं बोला। देवयोग से वायु के प्रचंड झोंकों ने नाव को एक भंवर में डाल दिया। नाविक ने ऊंचे स्वर में उस व्यक्ति से पूछा ‘कि भाई साहब आपको तैरना आया है या नहीं? दंभी व्यक्ति ने जवाब दिया, ‘नहीं मुझे कतई नहीं आता।’ मांझी बोला, ‘फिर तो आपको अपने इतिहास, भूगोल को बचाने के लिए बुलाना पड़ेगा। नहीं तो कुछ ही देर में आपकी सारी पढ़ाई-लिखाई बरबाद होने वाली है, क्योंकि नाव अब भंवर में डूबने वाली है।’ इतना कहकर नाविक नदी में कूद गया और तैरता हुआ किनारे की ओर बढ़ने लगा। तब उस व्यक्ति को समझ में आया कि व्यक्ति को किसी विद्या या कला में पारंगत होने में घमंड नहीं करना चाहिए।

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